बड़हरिया विधानसभा सीट को भाजपा के खाते में देने की मांग तेज
भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप – अब तक सहयोगी दलों को ही दी जाती रही है सीट, पहली बार भाजपा को मौका देने की मांग
बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे बड़हरिया विधानसभा सीट को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराज़गी और मांगें खुलकर सामने आने लगी हैं। बड़हरिया के भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने संयुक्त प्रेसवार्ता कर शीर्ष नेतृत्व से यह मांग की है कि इस बार यह सीट भाजपा के खाते में दी जाए।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब से बड़हरिया विधानसभा अस्तित्व में आई है, तब से अब तक भाजपा को एक बार भी प्रत्याशी उतारने का अवसर नहीं मिला। हर बार यह सीट एनडीए के सहयोगी दलों—कभी जदयू, तो कभी लोजपा—के हिस्से में जाती रही है। इससे भाजपा कार्यकर्ताओं में गहरा असंतोष है और उनका सब्र टूटता दिख रहा है।
नेताओं ने कहा कि यदि इस बार भाजपा खुद यहां से चुनाव लड़ेगी तो कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और उनमें नई ऊर्जा का संचार होगा। उनका मानना है कि सामाजिक और राजनीतिक समीकरण के हिसाब से बड़हरिया विधानसभा भाजपा के लिए पूरी तरह अनुकूल है और यदि पार्टी यहां से अपना उम्मीदवार उतारती है तो सीट रिकॉर्ड मतों से जीत सकती है।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने यह भी चिंता जताई कि पिछले विधानसभा चुनाव में जब यह सीट जदयू के खाते में गई थी, तो उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीर्ष नेतृत्व ने समय रहते इस पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आने वाले चुनाव परिणाम चिंताजनक हो सकते हैं।
भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप – अब तक सहयोगी दलों को ही दी जाती रही है सीट, पहली बार भाजपा को मौका देने की मांग
बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे बड़हरिया विधानसभा सीट को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराज़गी और मांगें खुलकर सामने आने लगी हैं। बड़हरिया के भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने संयुक्त प्रेसवार्ता कर शीर्ष नेतृत्व से यह मांग की है कि इस बार यह सीट भाजपा के खाते में दी जाए।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब से बड़हरिया विधानसभा अस्तित्व में आई है, तब से अब तक भाजपा को एक बार भी प्रत्याशी उतारने का अवसर नहीं मिला। हर बार यह सीट एनडीए के सहयोगी दलों—कभी जदयू, तो कभी लोजपा—के हिस्से में जाती रही है। इससे भाजपा कार्यकर्ताओं में गहरा असंतोष है और उनका सब्र टूटता दिख रहा है।
नेताओं ने कहा कि यदि इस बार भाजपा खुद यहां से चुनाव लड़ेगी तो कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और उनमें नई ऊर्जा का संचार होगा। उनका मानना है कि सामाजिक और राजनीतिक समीकरण के हिसाब से बड़हरिया विधानसभा भाजपा के लिए पूरी तरह अनुकूल है और यदि पार्टी यहां से अपना उम्मीदवार उतारती है तो सीट रिकॉर्ड मतों से जीत सकती है।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने यह भी चिंता जताई कि पिछले विधानसभा चुनाव में जब यह सीट जदयू के खाते में गई थी, तो उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीर्ष नेतृत्व ने समय रहते इस पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आने वाले चुनाव परिणाम चिंताजनक हो सकते हैं।

